22.07.2025 मधुस्री नालुबोला खम्मम:
तेलंगाना में कृषि उत्पादकता बढ़ाने में कीटों की पहचान कैसे की जाएगी?
किसानों को जागरूक करने और जानकारी को स्थानीय भाषा (तेलुगु) में लाने के लिए कौन सी योजनाएँ बनाई गई हैं?
खम्मम सांसद राम सहायम रघुराम रेड्डी ने लोकसभा में पूछा सवाल
नई दिल्ली:खम्मम से लोकसभा सांसद राम सहायम रघुराम रेड्डी ने मंगलवार को संसद में प्रश्न करते हुए जानना चाहा कि क्या केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली (एनपीएसएस) किसानों की कीटनाशक विक्रेताओं पर निर्भरता को कम करेगी? उन्होंने यह भी पूछा कि कृषि उत्पादकता में सुधार हेतु तेलंगाना में कीटों की पहचान कैसे होगी, और किसानों को जानकारी स्थानीय भाषा में कैसे दी जाएगी? इस पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लिखित उत्तर दिया।देशभर में 15 अगस्त 2024 को एनपीएसएस प्रणाली शुरू की गई। यह प्रणाली कीटों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) जैसी नवीनतम डिजिटल तकनीकों का उपयोग करती है। तेलंगाना सहित सभी राज्यों के किसानों को 65 फसलों में कीट प्रबंधन सलाह दी जाती है। इस हेतु एक मोबाइल ऐप और वेब पोर्टल भी उपलब्ध हैं।
अब तक कपास, धान, मक्का, मिर्च, गेहूं, सोयाबीन, गन्ना, अरहर, केला, अनार, टमाटर, बैंगन, आम जैसी 31 प्रमुख फसलों के लिए कीट प्रबंधन सलाहें जारी की जा चुकी हैं। किसानों के लाभ के लिए अंग्रेजी, हिंदी, मराठी, पंजाबी और उड़िया भाषाओं में 10,713 कीट प्रबंधन सलाहें दी गई हैं।केंद्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन केंद्र (CIPMC), कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), और राज्य कृषि विभागों के माध्यम से किसानों एवं अधिकारियों के लिए कीट पहचान, कीटनाशक उपयोग और जागरूकता के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम व कार्यशालाएँ आयोजित की जा रही हैं।
इसके अतिरिक्त, CIPMC ने तेलंगाना के सभी जिलों में 32 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए हैं। किसानों को तेलुगु भाषा में बुकलेट वितरित की गई है। “రైతు నేస్తం” (रैतु नेस्तम) नामक सम्मेलन कार्यक्रम राज्य कृषि विभाग द्वारा आयोजित किया गया, और 1,034 किसान वेदिकाओं पर एनपीएसएस प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संपन्न हुए हैं।















